बहुत दूर आ गयें हैं खुद से लड़ते लड़ते की
भूल गयें हैं मोड़ कौनसे लिए थे .
हर मोड़ पर लोग मिले ,
कुछ अपने बन गए .कुछ बीच रस्ते पर अकेला छोड़ गए
और कुछ हमें सीढ़ी बनाकर खुद ऊपर पहुँच गए
वापस जाने का मन है,
हाँ उसी जगह जहाँ बस दोस्ती थी और अपने खुद के विचार
पर वापस जायें भी तो कैसे इतना दूर जो आ चुकें हैं.
उन दोस्तों का सहारा है जो आज भी सबसे बुलंद है
अकेले कभी न पड़ेगें इस भरोसे पर हम दंग हैं
आगे बहुत मोड़ हैं चलने में वो मज़ा नहीं
मुकाम तो साफ़ दिख रहा है पर दर्द बांटने को कोई नहीं
वापस जाने को मन बहुत है पर क्या करें इतना दूर जो आ गयें हैं की याद नहीं मोड़ कौनसे लिए थे
अपने बारे में तो हर कोई सोचता है
दूसरों के बारे में सोचना भूल गयें हैं
अपनी ज़िन्दगी को तो हर कोई जानता है
दूसरों के बारे में जानना भूल गयें हैं
अपने दुःख में तो हर कोई रोता है
दूसरों के दर्द में शामिल होना भूल गयें हैं
खुद के लिए तो हर कोई वक़्त निकलता है
दूसरों को वक़्त देना भूल गयें हैं
अब न कुछ बातें हैं करने को न ही है मन बात करने को
बस वापस जाना चाहते हैं ,उस अजीब सी दुनिया में,
जहाँ "हम" से पहले आता था "तुम" और पैसों से पहले प्यार
पर क्या करें इतना दूर जो अब आ गयें है
की भूल गयें हैं मोड़ कौनसे लिए थे